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Smaller cities offer bigger salaries; 9.5% increments, higher than metros

👤 Vinay Kumar⏱️ 3 मिनट पढ़ने का समय
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मुंबई27 मिनट पहले

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सर्वे के मुताबिक, चेन्नई, पुणे व हैदराबाद 9.7-9.6% वेतन वृद्धि के साथ मेट्रो में आगे हैं। - प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar

सर्वे के मुताबिक, चेन्नई, पुणे व हैदराबाद 9.7-9.6% वेतन वृद्धि के साथ मेट्रो में आगे हैं। – प्रतीकात्मक फोटो

दस साल पहले तक जो शहर सिर्फ ‘वॉल्यूम मार्केट’ माने जाते थे, आज वही वेतन वृद्धि की दौड़ में दिल्ली और मुंबई को पीछे छोड़ रहे हैं। टीमलीज की ‘जॉब्स एंड सैलरीज प्राइमर’ रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2026-27 में अहमदाबाद और विशाखापट्टनम में वेतन वृद्धि 9.5% रहने का अनुमान है।

तुलना करें तो दिल्ली और मुंबई के लिए यह आंकड़ा 9.3-9.3% है। मतलब साफ है- इन दो मध्यम आकार के शहरों ने देश के दो बड़े ‘बिजनेस सेंटर्स’ को पीछे छोड़ दिया। नागपुर और जयपुर भी 9.3% वेतन वृद्धि के साथ दिल्ली की बराबरी कर रहे हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे ठोस ढांचागत कारण हैं। इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली, इलेक्ट्रिक गाड़ियों का उत्पादन और सरकार की ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ और अक्षय ऊर्जा को लेकर नीतियां शामिल हैं। कोयंबटूर, नागपुर और विशाखापट्टनम अब पूरी तरह औद्योगिक हब के रूप में उभर चुके हैं।

टीमलीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बालासुब्रमण्यन का कहना है, ‘अब ग्रामीण और गैर-मेट्रो मार्केट सिर्फ वॉल्यूम (बिक्री) नहीं चाहते, वे क्वालिटी चाहते हैं। एंट्री-लेवल की कारें वापस आ गई हैं, हैचबैक बिक रही हैं और इलेक्ट्रिक दोपहिया गैर-मेट्रो शहरों में धड़ाधड़ बिक रहे हैं। कंपनियों को बस वहां सही टैलेंट चाहिए।’ 2030 तक गैर-मेट्रो शहर देश की कुल खपत में 50% से ज्यादा योगदान दे सकते हैं। यह अनुमान ‘कॉरपोरेट इंडिया’ की रणनीति भी बदल रहा है। सेक्टर की बात करें तो वेतन वृद्धि की अगुवाई अब आईटी या बैंकिंग सेक्टर नहीं, बल्कि ईवी और ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर कर रहे हैं। इनमें 10.2% इंक्रीमेंट का अनुमान है। फिनटेक 10% और हेल्थकेयर-फार्मा 9.7% के साथ पीछे हैं। मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग सेक्टरों में 2025-26 के लिए वृद्धि 9.4% रही।

पश्चिम एशिया में युद्ध का साया भी नजर आ रहा है। इनपुट लागत बढ़ रही है और रुपया दबाव में है। बालासुब्रमण्यन कहते हैं कि अधिकांश इंक्रीमेंट बजट मार्च से पहले ही तय हो चुके थे, इसलिए युद्ध का पूरा असर अभी नहीं दिखा। अगर यह संघर्ष छह महीने और चला, तो भी ग्रोथ तो मिलेगी, पर उतनी नहीं जितना पहले अनुमान था।’

भोपाल, जयपुर, नागपुर जैसे टियर 2 शहरों में 9% से ज्यादा वेतन वृद्धि

23 सेक्टरों, 20 शहरों की 1,268 कंपनियों पर आधारित सर्वे के मुताबिक, चेन्नई, पुणे व हैदराबाद 9.7-9.6% वेतन वृद्धि के साथ मेट्रो में आगे हैं। अहमदाबाद, विशाखापट्टनम 9.5% ग्रोथ के साथ दिल्ली-मुंबई (9.3%) से ऊपर। नागपुर, जयपुर 9.3% के साथ दिल्ली की बराबरी कर रहे। वडोदरा-गुड़गांव 9.2%, कोयंबटूर 9.1%, भोपाल 9% के साथ मध्य क्रम में हैं। कोच्चि, लखनऊ, इंदौर, चंडीगढ़ और सूरत में 8.4-8.8% के बीच वेतन वृद्धि मिल रही।



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