Finance

US-Iran Tensions Fuel Inflation Rise to 8.30%

👤 Vinay Kumar⏱️ 3 मिनट पढ़ने का समय
US-Iran Tensions Fuel Inflation Rise to 8.30%


  • Hindi News
  • Business
  • US Iran Tensions Fuel Inflation Rise To 8.30% | Daily Necessities & Fuel Costs Surge

नई दिल्ली8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मार्च में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 8.30% पर पहुंच गई है। मार्च में यह 3.88% पर थी। यानी इसमें एक महीने के अंदर 4.42% की बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल में महंगाई 42 महीने के हाई पर रही। अक्टूबर 2022 में ये 8.39% पर पहुंच गई थी।

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 मई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। यह तनाव लंबा चला तो महंगाई आगे और बढ़ सकती है।

रोजाना जरूरत के सामान, फ्यूल और पावर के दाम बढ़े

  • रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 6.36% से बढ़कर 9.17% हो गई।
  • खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई 1.85% से बढ़कर 1.98% पर पहुंच गई है।
  • फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर 1.05% से बढ़कर 24.71% हो गई है।
  • मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर 3.39% से बढ़कर 4.62% रही।

वित्त वर्ष 2025-26 में थोक महंगाई

महीना थोक महंगा
अप्रैल 0.85%
मई 0.39%
जून -0.13%
जुलाई -0.58%
अगस्त 0.52%
सितंबर 0.13%
अक्टूबर -1.21%
नवंबर -0.32%
दिसंबर 0.83%
जनवरी 1.81%
फरवरी 2.13%
मार्च 3.88%

होलसेल महंगाई के 4 हिस्से

प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं।

  • फूड आर्टिकल्स जैसे अनाज, गेहूं, सब्जियां
  • नॉन फूड आर्टिकल में ऑयल सीड आते हैं
  • मिनरल्स
  • क्रूड पेट्रोलियम

रिटेल महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48% पर पहुंची

अप्रैल की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई है। इससे पहले मार्च में यह 3.40% थी। महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20% पर पहुंच गई। मार्च में यह आंकड़ा 3.87% था।

होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर

थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है।

जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।

महंगाई कैसे मापी जाती है?

भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है।

महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।

खबरें और भी हैं…



Source link

📰 स्रोत: यह खबर स्वचालित RSS फीड से एकत्र की गई है। किसी भी सुधार या शिकायत के लिए कृपया संपर्क करें

💬 टिप्पणियाँ (0)

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं…

    अपनी टिप्पणी लिखें

    टिप्पणी मॉडरेशन के बाद प्रकाशित होगी।

    और पढ़ें

    US-Iran Tensions Fuel Inflation Rise to 8.30% | खबर एक्सपी